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पश्चिमी चंपारण की धरती से आने वाले मशहूर संगीतकार और निर्देशक रजनीश मिश्रा को मिला दादा साहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन अवार्ड

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भोजपुरी म्यूजिक जगत में सुरीली तान छेड़ने वाले और अपने निर्देशन से भोजपुरी सिनेमा मेकिंग को नव जीवन प्रदान करने वाले संगीतकार सह निर्देशक रजनीश मिश्रा को उनकी फिल्म “माई – द प्राइड ऑफ भोजपुरी” के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का दादा साहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन अवार्ड दिया गया । यह अवार्ड उनको मुंबई के जुहू स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह के दौरान कश्मीर फाइल व मैरी कॉम फेम दर्शन कुमार और इंडियन पिक्चर्स प्रोड्यूसर एसोसिएशन के अध्यक्ष अभय सिन्हा द्वारा दिया गया। अवार्ड पाकर रजनीश मिश्रा ने सबों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस अवार्ड के लिए मैं दादा साहब फाल्के फिल्म फाउंडेशन अवार्ड का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझे इस काबिल समझा। इस अवार्ड ने मेरी जिम्मेदारी और भी बढ़ा दी है। इसके साथ नाम जुड़ना ही एक सम्मान है।

मालूम हो कि रजनीश मिश्रा ने अपने करियर में कई उत्कृष्ट भोजपुरी फिल्मों का निर्देशन किया है और हजारों गानों को अपने संगीत से सुरीला बनाया है। इसमें से कई ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा प्राप्त की है। रजनीश मिश्रा को यह पुरस्कार मिलने से उनके प्रशंसकों और फिल्म उद्योग में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह पुरस्कार न केवल उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि भोजपुरी सिनेमा के विकास में उनके योगदान को भी सम्मानित करता है। विदित हो कि रजनीश मिश्रा बिहार के ऐतिहासिक पश्चिमी चंपारण जिला अंतर्गत नरकटियागंज के केहुनिया से आते हैं। उनके पिता का नाम चंद्रभूषण मिश्रा है। उन्होंने अपनी फिल्म जर्नी की शुरुआत संगीत निर्देशन से किया, उसके बाद खेसारीलाल यादव को लेकर फिल्म बनाई “मेंहदी लगा के रखना”, जिसने भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में फिल्म मेकिंग के अप्रोच को ही बदल दिया और अब एक से बढ़ कर एक फिल्में बन रही हैं। माई द प्राइड का भोजपुरी के अलावा उन्होंने फिल्म मेहंदी लगा के रखना, सेहरा बांध के आऊंगा, डार्लिंग जैसी सफल और ब्लॉकबस्टर फिल्म में बनाई है। आज भी उनके काम की कोई बराबरी नहीं कर सकता।

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