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आसनसोल में भी आदित्य मोहन जलवा बरकरार, नाटक “नानी बाई रो मायरो” को देख कर भक्त हुए भावुक

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प्रयागराज – राजस्थान व गुजरात के लोक संगीत और भगवान -भक्त के अटूट संबंध को दर्शाने वाला नाटक ‘नानी बाई रो मायरो‘ का मंचन बिहार के आसनसोल में 24 अप्रैल को दर्शकों का भरपुर प्यार मिला है। राजस्थानी नट सम्राट की उपाधि प्राप्त राजेश प्रभाकर मंडलोई द्वारा लिखित निर्देशित और अभिनित इस नाटक को लोकप्रिय बनाने का भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के हीरो आदित्य मोहन दूबे को जाता है जो नाटक में श्रीकृष्ण की भगवान को निभाते चले आ रहे है। मुंबई, गुजरात और राजस्थान से बिहार में इस नाटक के मंचन का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। बात करें तो आदित्य मोहन 25 भोजपुरी फिल्म व कई हिंदी फिल्मों में बतौर मुख्य नायक के रुप मे नजर आ चुके है।

नाटक के संयोजक आसनसोल दीपक तोदी है। इसमें अभिनय करने वालें कलाकारों में राधा का किरदार आश्का मंडलोई, नानी बाई का रोल बरखा पंडित, नानी की सास की भूमिका में दीपाली चौकसी व ससुर की भूमिका में  प्रखर इंदूरकर नजर आने वाले हे।
पर्दे के पीछे कलाकारों में स्वप्निल जाधव, प्रतीक अंभोरे के अलावा लाइट्स मे़ रमेश गुरव, राजन मुननकर करेंगे। नृत्य निर्देशन प्रकाश राणे, संगीत घनश्याम भगत का हैं । इसके अलावा स्वर पप्पू शर्मा खाटूवाले,रेखा राव, हरिमहेंद्र सिंह रोमी ने दिए है। इसके भजन लेखक
स्व. श्री प्रभाकर मंडलोई हैं । इसकी निर्मात्री वर्षा राजेश मंडलोई है।पी आर ओ अरविंद मौर्य व हिमांशु यादव हैं इससे पहले यह नाटक देश के बडे़-बड़े शहरों में मंचित किया जा चुका है।

कथा
‘नानी बाई रो मायरो‘  में नानी बाई भगवान द्वारिकाधीश की भक्त होती है। यह एक गरीब परिवार से है। लेकिन भक्ति का  खजाना अतुल्य है। इनके पिता भी भगवान भक्त होते है। ‘मायरो ‘ को गुजराती में भात कहा जाता है। नानी बाई के विवाह में भात रस्म के इनके पास धन नहीं होता है , जिससे कि भात की रस्म को पूरा किया जा सके। इसलिए परिवार की इज्जत बनाने के लिए वह द्वारिकाधीश को पुकारती है। भगवान द्वारिकाधीश उसकी पुकार सुनते हैं और अपनी रानियों के साथ वहां आते हैं अपनी स्वर्ण मुद्राओं से अपनी भक्तन की भात की रस्म को पूरा करते है। सपरिवार ऐसे मंचन का लाभ उठाए और अपने परिवार को भारतीय संस्कृति से अवगत कराए।।

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